संस्कृत भाषा भारतीय ज्ञान-परंपरा की धरोहर: डॉ. विश्वेश वाग्मी

श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिडला परिसर स्थित संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत सप्ताह महोत्सव मनाया गया। इस उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यानमाला के संयोजक डॉ. विश्वेश वाग्मी ने बताया कि इस व्याख्यानमाला में देश के लगभग 12 राज्यों के विद्वानों और श्रोताओं ने प्रतिभाग किया। डॉ. वाग्मी ने बताया कि संस्कृत सप्ताह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने का एक अवसर है। इससे भाषा का संरक्षण तो होता ही है, साथ ही युवाओं में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना भी बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा भारतीय ज्ञान-परंपरा की धरोहर है। संस्कृत सप्ताह का आयोजन हमें यह याद दिलाता है कि हमारी इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। हमें न केवल इस सप्ताह बल्कि पूरे वर्ष संस्कृत के अध्ययन और प्रयोग की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से प्रो. ललित गौड ने संस्कृतभाषा की आधुनिता पर अपने विचार प्रस्तुत किये। गुरुकुल कांगडी से डॉ वेदव्रतः ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में संस्कृत का स्थान पर अपना वक्तव्य दिया। हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय से प्रो० योगेन्द्र कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और संस्कृत इस विषय पर अपना व्याख्यान दीया। महर्षिदयानन्दविश्वविद्यालय से डॉ रविप्रभात ने संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता पर अपने तर्क प्रस्तुत किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डा० विनोदकुमार ने संस्कृत भाषा एवं संस्कृति पर अपने विचार दिये तथा केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से डाॅ सचिदानन्द स्नेही ने संस्कृत की दार्शनिकता पर अपने मत प्रस्तुत किया।विविध वक्ताओं के साथ-साथ देश के अनेकों राज्यों से लोग जुडे रहे।
इस व्याख्यान माला के संरक्षक कुलपति श्रीप्रकाश सिंह थे। अध्यक्ष प्रो० कमला चौहान संयोजक, डाॅ विश्वेश वाग्मी सह संयोजक, डाॅ प्रीति वाग्मी एवं डाॅ बालकृष्ण बधानी, व्याख्यान माला का संचालन डाॅ दिनेश पाण्डेय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ राजपाल शास्त्री ने किया।संस्कृत विभाग में भी छात्र – छात्राओं नें विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम सें इस व्याख्यान माला को सम्पन्न किया.